Tuesday, June 18, 2024
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Big breaking: केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहितों ने केदारनाथ धाम में लगाए गए नकली सोने समेत चार सूत्रीय मांगों को लेकर किया आमरण अनशन शुरू: देखें वीडियो – RAIBAR PAHAD KA


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श्री केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों ने अपनी चार सूत्रीय मांग को लेकर आमरण अनशन किया शुरू।

/ केदारनाथ
। बाबा केदार की पूजा अर्चना के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले तीर्थ पुरोहितों और आपदा से प्रभावित केदार पुरी के भवन स्वामियों ने उत्तराखंड सरकार को चेताने के लिए आज सोमवार से अन्न जल त्यागकर आमरण अनशन पर बैठ गए है।

श्री केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि चार सूत्रीय मांग को लेकर शनिवार से उनका क्रमिक अनशन प्रारम्भ हुआ था, जिसे शासन प्रशासन की बेरूखी के चलते आज से आमरण अनशन में तब्दील कर दिया गया। आज तीर्थ पुरोहित संदीप सेमवाल और कमल तिवारी आमरण अनशन पर बैठ गए है।

आमरण अनशन पर बैठे श्री केदार सभा और व्यापार मंडल के महामंत्री संदीप सेमवाल ने कहा बाबा केदारनाथ के समक्ष आज से अन्न जल त्याग कर सत्याग्रह की शुरूआत कर ली है। शासन प्रशासन की मनमानी के विरोध में केदारनाथ धाम का यह संदेश उत्तराखंड समेत पूरे देश में जाएगा। सरकार हमें 2013 से लगातार गुमराह कर रही है, हमारे लोगों ने सरकार के अधिग्रहण, अनुबंध का सम्मान किया है, लेकिन हमारे साथ विश्वासघात किया गया है। धर्म आस्था की नगरी में यह सरकार का घोर अन्याय है। अब आगे सरकार हमारी अनदेखी करती है तो विरोध प्रदर्शन और व्यापक होगा।

बता दें विगत शनिवार को केदारनाथ धाम में पूर्ण बंदी आहूत की गई। बड़ी तादाद में केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित और भवन स्वामी चार सूत्रीय मांग जिसमें वर्ष 2013 की आपदा में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त भवन स्वामियों को भू स्वामित्व देने, मंदिर चबूतरा बनाने में अधिग्रहित भूमि के ऐवज में भूस्वामित्व के साथ भवन देने और अनुबंधों के आधार पर तीर्थ पुरोहितों के भवनों को जल्द तैयार कर सौपने और केदारनाथ मंदिर गर्भगृह में लगाए गए कथित सोने की उच्चस्तरीय जांच की मांग पर प्रदर्शन कर रहे है।

अनशन पर बैठे केदार सभा के कमल तिवारी कहते है कि केदारनाथ में आपदा से प्रभावित तीर्थ पुरोहितों को 2013 से भूमिधारी अधिकार के तहत भवन अभी तक नहीं मिल पाए हैं और उसके साथ ही जो भवन खड़े हैं उनसे भी छेड़छाड़ की जा रही है, हमने ज्ञापन, पूर्ण बंदी, क्रमिक अनशन के बाद ही आमरण अनशन का फैसला लिया है। यह अस्तित्व, हक हकूक और न्याय की लड़ाई है

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