Home उत्तराखंड स्व.इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान -2023 से सम्मानित हुए ऐतिहासिक लोक धरोहर के स्तम्भ शिवजनी – RAIBAR PAHAD KA

स्व.इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान -2023 से सम्मानित हुए ऐतिहासिक लोक धरोहर के स्तम्भ शिवजनी – RAIBAR PAHAD KA

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स्व.इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान -2023 से सम्मानित हुए ऐतिहासिक लोक धरोहर के स्तम्भ शिवजनी – RAIBAR PAHAD KA

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उत्तराखण्ड पृथक राज्य आन्दोलन की धुरी रहे इन्द्रमणि बडोनी जी की 24वीं पुण्यतिथि पर इन्द्रमणि बडोनी चैरिटेबल ट्रस्ट और इन्द्रमणि बडोनी कला एवं साहित्य मंच के सयुंक्त तत्वावधान में दिनांक 18 अगस्त 2023 को चमियाला, टिहरी गढ़वाल में ‘इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वर्ष 2023 के लिए इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान प्रसिद्ध ढोलवादक श्री शिवजनी को दिया गया।
स्थानीय समाजसेवी आनन्द व्यास की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी को पुष्पांजलि के साथ हुई। पृथक उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले स्व. बडोनी जी का स्मरण करते हुए लोकेन्द्र जोशी ने वर्तमान राजनेताओं को बडोनी जी के जीवन से शिक्षा लेकर उनके आदर्शों पर चलने को कहा। कार्यक्रम को आगे बढा़ते हुये इस आयोजन में विशेष भूमिका निभाने वाले युवा कवि व लेखक अनिल सिंह नेगी ने हमारे समाज में पनप रही ‘काकटेल’ की कुप्रथा पर अपनी एक जोरदार कविता प्रस्तुत की।
देहरादून से कार्यक्रम में शिरकत कर रहे है गढ़वाली कवि आशीष सुन्दरियाल ने अपनी ‘गौं’ शीर्षक से कविता को सुनाया। इसके बाद कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि- कवि, साहित्यकार, रंगकर्मी व फिल्म अभिनेता मदन मोहन डुकलाण का उद्बोधन हुआ। मदन डुकलाण ने कहा कि जब इन्द्रमणि बडोनी जी को वाशिंगटन टाईम्स और बी.बी.सी जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के द्वारा ‘ Mountain’s Gandhi (पहाड़ का गांधी)’ जैसी उपाधि से नवाजा गया तो प्रत्येक पहाड़ी का सिर गर्व से उपर उठ गया। उन्होंने कहा कि बडोनी जी का उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में विशेष योगदान है और यदि आज बडोनी जी होते तो उत्तराखण्ड की दशा व दिशा बिल्कुल भिन्न होती।
मदन डुकलाण के उद्बोधन के उपरांत वयोवृद्ध ढोल वादक शिवजनी जी को इन्द्रमणि बडोनी स्मृति सम्मान-2023 प्रदान किया गया, जिसके अंतर्गत उनका माल्यार्पण के साथ ही शॉल ओढ़कर, मोमेंटो प्रदान कर, प्रशस्ति पत्र वाचन के साथ ही इक्कीस हजार रूपये के साथ बड़े आदर और अपनत्व के साथ उपस्थित जन समुदाय द्वारा खडे होकर करतल ध्वनि से अभिनंदन किया गया l इस अवसर पर युवा ढोलवादक त्रिष्ठव बडोनी और गिराज द्वारा बढई और पूजा ताल बजाया गया l इन्द्रमणि बडोनी चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य स्तम्भ और कार्यक्रम के सूत्रधार विनोद बडोनी ने कहा कि स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी कुशल राजनेता के साथ एक प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी भी थे इसलिए उनकी स्मृति में दिये जाने वाला यह सम्मान वयोवृद्ध ढोल वादक शिवजनी जी को दिया गया। शिवजनी जी, बडोनी जी के सांस्कृतिक दल का अभिन्न हिस्सा भी रहे हैं। श्रीमती विनीता सकलानी ने प्रशस्ति पत्र पढ़ा l शिवजनी जी के साथ उनके सहयोगी गिराज जी को भी माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया।
स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी को एक महान गांधीवादी नेता बताते हुये कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डा पवन कुदवान ने मीराबेन व बडोनी जी के वार्तालाप का जिक्र किया और गांधीजी की तरह ही बडोनी जी के आत्मनिर्भर गाँव के संकल्प का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम में शिव सिंह रावत व जयकृत सिंह नेगी को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद इन्द्रमणि बडोनी कला एवं साहित्य मंच, घनसाली के सचिव विनोद शाह के द्वारा अपने मंच का संक्षिप्त परिचय दिया गया। पुनः कविता के क्रम में बेलीराम कनस्वाल ने अपनी जबरदस्त कविता- ‘हे! देहरादूण, इनै सूण’ को सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को शहर व गाँव के द्वन्द्व से अवगत कराया।
चन्द्रमा प्रोडक्शन के संचालक बचन सिंह रावत ने स्व बडोनी जी से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि बडोनी जी देना जानते थे लेना नहीं। और इसीलिए ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख व विधायक होने के बाद भी उन्होंने कोई धन संचय नहीं किया तथा जीवन के अन्तिम पड़ाव मे विषम आर्थिक परिस्थितियों में जीवन जिया। समाजसेवी बचन सिंह रावत ने आयोजन संस्था को मदद के अलावा व्यक्तिगत रूप से भी ढोल जणगुरु शिवजनी को इक्कीस हजार रूपये और उपहार से सम्मानित किया l उन्होंने दमाऊं में संगत कर रहे गिराज को भी पांच हजार रूपये और उपहार के साथ सम्मानित किया l इसी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित शिक्षिका डा गीता नौटियाल ने अपनी पुस्तक ‘ पत्थर में बीज’ ( 60 अनुभवों का सामूहिक संकलन) को मंचासीन अतिथियों को सप्रेम भेंट किया।
पुनः कविताओं का क्रम शुरू हुआ और हरीश बडोनी ने स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी को समर्पित अपनी रचना – ‘ढम बजौ ढोल बड़ा, तब मिसौ बोल रे बड़ा’ को प्रस्तुत किया। इसके बाद इन्द्रमणि बडोनी कला एवं साहित्य मंच से जुड़े प्रकाश बिजल्वाण ने प्राकृतिक आपदा झेल रहे प्रदेश के दर्द को अपने गीत- न जीवन बचा न घरों की निशानी… पहाडो पे टूटा पहाडों का पानी… ‘ के माध्यम से व्यक्त किया। नशामुक्ति के अभियान में लगे आर. बी सिंह ने भी अपनी ओजपूर्ण वाणी से समाज को नशामुक्त करने का संकल्प हम सबको लेने का आवाह्न किया। इसके बाद मनोज रमोला ने एक गीत- जाण बैठिग उलार्या चौमास, द्योरू भी भिंडी बरखी नी ऐंसू’ के रूप में अपनी प्रस्तुति दी।
कविता व गीत प्रस्तुति के बाद मुख्य अतिथि शिक्षाविद् आचार्य सच्चिदानन्द जोशी ने अपने विचार प्रकट किये तथा इन्द्रमणि बडोनी जी की स्मृति मे आयोजित कार्यक्रम के लिए आयोजकों की प्रशंसा की। इसके बाद इसी कार्यक्रम में सम्मानित ढोलवादक शिवजनी जी ने ढोलवादन की एक छोटी सी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मन्त्रमुग्ध कर दिया। इंद्रमणी बडोनी जी द्वारा निर्देशित माधो सिंह भंडारी भाव नाटिका में चम्पू हुड़क्या और उदीना के लोकप्रिय कलाकार बालकृष्ण नौटियाल और कुंवर सिंह नेगी के नेतृत्व में केदार नृत्य की प्रस्तुति हुई l दोनों ही कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया गया l अन्त में अपने अध्यक्षीय भाषण में आनन्द व्यास ने स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी द्वारा किये कार्यों की चर्चा की तथा उनकी दूरगामी सोच के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये।
लगभग तीन घंटे चले इस कार्यक्रम में स्थानीय समाजसेवी व उद्यमी बचन सिंह रावत, इन्द्रमणि बडोनी जी के निर्देशन मे मंचित नृत्य नाटिका के कलाकार – कुंवर सिंह नेगी (उदिमा) , चम्पू हुड़क्या बालकृष्ण नौटियाल, नवोन्मेषी प्रयोगों के लिए चर्चित शैलेश मटियानी पुरुस्कार विजेता शिक्षक हृदयराम अन्थवाल, मनोज असवाल, राजेंद्र रावत, गोपाल दत्त सकलानी, वीरेंद्र सिंह राणा, राजेश गुसाईं, राजेंद्र प्रसाद बडोनी, रामेश्वर प्रसाद बडोनी, सूरत सिंह पंवार, हुकम सिंह रावत, संतोष सकलानी, विक्रम सिंह नेगी,अमन लॉज के मालिक रणवीर राणा, राजेश नेगी, बलीराम नौटियाल, केशर सिंह रावत, ड्रीम स्कूल ऑफ़ चाइल्ड एजुकेशन के छात्र – छात्राएं और स्टाफ, चंदन सिंह पोखरियाल, बरफ सिंह पोखरियाल आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कृतिकर्मी व शिक्षक गिरीश बडोनी जी ने किया।
-आशीष सुन्दरियाल

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