Home उत्तराखंड काम की खबर:रक्षाबंधन कब मनाएं 30 या 31 को कौन सा समय शुभ है भाई पर राखी बांधने का: जाने प्रसिद्ध आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं से – RAIBAR PAHAD KA

काम की खबर:रक्षाबंधन कब मनाएं 30 या 31 को कौन सा समय शुभ है भाई पर राखी बांधने का: जाने प्रसिद्ध आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं से – RAIBAR PAHAD KA

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काम की खबर:रक्षाबंधन कब मनाएं 30 या 31 को कौन सा समय शुभ है भाई पर राखी बांधने का: जाने प्रसिद्ध आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं से – RAIBAR PAHAD KA

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रक्षाबंधन कब मनाएं

रक्षाबंधन का मुहूर्त 31 तारिक को ही शुभ है क्योंकि 30 तारिक को 10:59 मि प्रातः से पूर्णिमा लगती है जो कि 31 तारिक सुबह 7 बजकर 6 मि तक जाएगी भद्रा भी 30 तारिक 10:59प्रातः से 9 बजकर 2 मि तक रहेगी जिसमे रक्षाबंधन निषेध है रक्षाबंधन का त्योहार दिन का है दिन के त्यौहार को दिन में ही मानना शुभ है इसलिए सबसे शुभ समय 6बजकर 36 मि प्रातः से 7 बजकर 5 मि तक प्रातः रक्षा सूत्र बांधे उसके बाद दिन भर जो भी आये उनसे बंधवा सकते हैं श्रावणी उपाक्रम यजुर्वेद अथर्ववेद उपाकर्म अपरस्तम्भ उपाकर्म ऋषि तर्पन आदि करने का शुभ मुहूर्त है न ही भद्रा में न ही रात्रि में तो 31 तारिक को ही प्रातः 6बजकर 36मि से 7बजकर 5 मि तक मनाने का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा जिसमे प्रमाण निम्न प्रकार के हैं
गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन पर्व का अल्पकालिक मुहूर्त रहेगा शास्त्रानुसार रक्षाबंधन का पवित्र पर्व भद्रा रहित अपराहन व्यापिनी पूर्णिमा में करना चाहिए
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा
यदि पहले दिन व्याप्त पूर्णिमा के अपराह्न काल मे भद्रा हो तथा दूसरे दिन उदयकाल की पूर्णिमा तिथि त्रिमुहुर्त व्यापिनी हो तो उसी उदयकालीन पूर्णिमा दूसरे दिन के अपराह्न में रक्षाबंधन करना चाहिए चाहे पूर्णिमा अपराह्न से पूर्व ही क्यों न समाप्त हो जाये क्योंकि उस समय साकल्य पादित पूर्णिमा का अस्तित्व होता ही है
पुरुषार्थ चिंतामणि का इस विषय मे प्रमाण है
यदा द्वितीयपराहणात पूर्व समाप्ता तदापि भद्रायां द्वे न कर्तव्ये
परन्तु यदि आगामी दिन दूसरे दिन पूर्णिमा त्रिमुहुर्त व्यापिनी न हो तो पहले दिन भद्रा समाप्त होने पर प्रदोषकाल में रक्षाबंधन करने का विधान कहा गया है


अथ रक्षाबंधनस्यमेव पूर्णिमायां भद्रारहितायाम त्रिमुहूरतादिकोदय व्यापिन्याम अपराह्न प्रदोषे वा कार्यम ।।उदयत्रिमुहूर्त न्युनत्वे पूर्वेद्यु भद्रा रहिते प्रदोषादिकाले कार्यम।।

परन्तु पंजाब हिमांचल दिल्ली आदि प्रदेशों में प्राचीन समय से ही परंपरागत रूप से उदय व्यापिनी पूर्णिमा के दिन ही प्रातः काल मे रक्षाबंधन मनाने का प्रचलन है पंजाब में कुछ सम्प्रदाय 31 अगस्त 2023 ई.को त्रिमुहुर्त न्यून उदयकालीक पूर्णिमा में ही रक्षाबंधन पर्व करेंगे जो इसी कड़ी में लेकिन लोकाचार में इस वर्ष 30 अगस्त 2023 ई. को अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा दोष व्याप्त है नहीं मना सकते त्योहार दिन का है और आगामी दिन 31 अगस्त गुरुवार को पूर्णिमा केवल प्रातः 7घ-6मि पर समाप्त हो रही है अतः उपरोक्त शास्त्र निर्णयानुसार तो 30 अगस्त बुधवार को ही प्रदोष काल के समय भद्रा रहित काल मे अर्थात 21घ.-03मि के बाद रक्षाबंधन पर्व मनाया जा सकेगा
परन्तु यह त्यौहार रात्रि का नही है चंडीगढ़ सेक्टर 35 से आचार्य रत्नमणि सेमल्टी रुद्रप्रयाग वेद भवन सँस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ भानु प्रकाश देवली भारत माता मंदिर हरिद्वार के महंत ललिता गिरी महाराज उत्तराखंड विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य जय प्रकाश गोदियाल ऋषिकेश से आचार्य राकेश बहुगुणा व अन्य विद्वानों के निर्णय व मेरे मतानुसार 31 तारिक को ही रक्षाबंधन मनाना शुभ रहेगा
आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं
ज्योतिष्पीठ व्यास बदरिकाश्रम

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