Tuesday, June 18, 2024
spot_img
Homeउत्तराखंडअहंकार की अनुपस्थिति के बाद ही पुण्य की सुगंध आती है आचार्य...

अहंकार की अनुपस्थिति के बाद ही पुण्य की सुगंध आती है आचार्य ममगाईं – RAIBAR PAHAD KA


शेयर करें

अहंकार की अनुपस्थिति में पुण्य की सुगंध है उसका फ़ैलाव है इसलिए यदि कोई कर्ता रहकर पुण्य भी करे तो पाप हो जाता है कर नही सकता इसलिए हो जाता है हो ही नही सकता दूसरी बात भी नही हो सकती है कि कर्ता मिट जाए और कोई पाप करे यह भी नही हो सकता हमने जो अंतर किया है
उक्त विचार ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने अपर सारथी विहार भैरव मन्दिर प्रांगण देहरादून में मैठाणी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यक्त करते हुए कहा कि पाप और पुण्य का अच्छे बुरे का वह उन लोगो ने किया है जिनके पास कर्ता उपस्थित है जिनका अहंकार उपस्थित है इस अहंकार के उपस्थित रहते हमे ऐसी व्यवस्था करनी पड़ती है कि हम बुरे व्यक्ति को बुहत बुरा कहते हैं ताकि अहंकार को चोट लगे हम बुरा करते हैं अहंकार से भरकर ही बिना अहंकार के बुरा हम कर नही सकतेजिस क्षण हम परमात्मा को सब कर्तब्य दे देते हैं अहंकार छूट जाता है बुरे को करने की बुनियादी आधारशिला ही गिर जाती है बुरे का कर्ता तो कोई भी होने को अछत नही और सच्चाई यह है कि बुरा बिना कर्ता के होता नही है भिखारी भी जानते है कि यदि आप अकेले मिल जाये रास्ते पर तो उनको विश्वास कम होता है कि दान मिलेगा चार व्यक्ति आपके साथ हों तब उनको भरोसा बढ़ जाता है अतः भिखारी को एकाकी कोई मिल जाये तो काम नही बनता उसे भीड़ में आपको पकड़ना पड़ता है
इस अवसर पर मुख्य रूप से आनन्दमणि मैठाणी हिमांशु मैठाणी रवि मैठाणी मोहित मैठाणी संचित शम्भु प्रसाद ओम प्रकाश शांति प्रसाद नौटियाल विनोद नौटियाल परमानंद जी बीना वर्षा पूर्व सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल जी पूर्व बदरी केदार मन्दिर समिति के अध्यक्ष हरीश डिमरी जी सुमित्रा रेखा कविता डिमरी इंदु राजेश्वरी आचार्य दिवाकर भट्ट आचार्य रमेश चन्द्र भट्ट आचार्य संदीप बहुगुणा आचार्य द्वारिका नौटियाल आचार्य संदीप भट्ट आचार्य नीरज डबराल सुरेश जोशी आदि भक्त गण भारी सँख्या में उपस्थित थे।।

About Post Author



Post Views:
120

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments