आर्धनारीश्वर इसलिए कहा गय शिव को आचार्य: ममगांई – Sainyadham Express

आर्धनारीश्वर इसलिए कहा गय शिव को आचार्य: ममगांई

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आज अर्धनारीश्वर मन्दिर किशनपुर राजपुर मः स्थानीय लोंगो के द्वारा आयोजित शिव महापुराण में शिव पार्वती विवाह की सुन्दर झांकी निकाली गई कोई बने बराती कोई घराती पर उत्साहपूर्ण महोल मे कैलाश जैसा प्रतीत हो रहा था वहीं प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य शिवप्रसाद ममगांई जी नें कहा सती ने ही हिमाचल के घर मैना से जन्म लिया जिनका कुलोचित नाम पार्वती पड़ा माता पिता की सहमती से तीन हजार वर्ष तक तप किया शिव जी को पती रूप में प्राप्त किया वैसे शिव शक्ती अलग नही हैं।

 

शिव को अर्द्धनारीश्वर भी कहा गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव आधे पुरुष ही हैं या उनमें संपूर्णता नहीं। दरअसल, यह शिव ही हैं, जो आधे होते हुए भी पूरे हैं। इस सृष्टि के आधार और रचयिता यानी स्त्री पुरुष शिव और शक्ति के ही स्वरूप हैं। इनके मिलन और सृजन से यह संसार संचालित और संतुलित है। दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। नारी प्रकृति है और नर पुरुष। प्रकृति के बिना पुरुष बेकार है और पुरुष के बिना प्रकृति। दोनों का अन्योन्याश्रय संबंध है। अर्धनारीश्वर शिव इसी पारस्परिकता के प्रतीक हैं।

 

आधुनिक समय में स्त्री पुरुष की बराबरी पर जो इतना जोर है, उसे शिव के इस स्वरूप में बखूबी देखा समझा जा सकता है। यह बताता है कि शिव जब शक्ति युक्त होता है तभी समर्थ होता है। शक्ति के अभाव में शिव ‘शिव’ न होकर ‘शव’ रह जाता है।
नीलकंठ क्यों…?

अमृत पाने की इच्छा से जब देव दानव बड़े जोश और वेग से मंथन कर रहे थे, तभी समुद से कालकूट नामक भयंकर विष निकला। उस विष की अग्नि से दसों दिशाएं जलने लगीं। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया। देवताओं और दैत्यों सहित ऋषि, मुनि, मनुष्य, गंधर्व और यक्ष आदि उस विष की गरमी से जलने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान शिव विषपान के लिए तैयार हो गए। उन्होंने भयंकर विष को हथेलियों में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गये आदि प्रसङ्गों पर भक्त भावविभोर होगये
आज विशेष रूप से पूजन में अरुण कपूर हिमा कपूर पार्षद एवं महानगर महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला थापा, श्री भूपेन्द्र सिंह नेगी, कुसुम नेगी अभिनव नेगी चंपा मधवाल, अशोक धापा, , नीतू रावत, निर्मला गुसाई, ममता गुसाई, गीता थापा, शिवचरण भण्डारी, अनीता धस्माणा, विरेन्द्र नेगी, पपेन्द्र, सुमन, राजेन्द्र बंगवाल, माला बंगवाल, राधव गोयल, बन्नी मधवाल, संजीव गुसाई, संजू, संजीता, सुनील नौटियाल, अनील चमोली, सुनील ममगाई, आचार्य दिवाकर भट्ट, आचार्य अजय जुयाल, आचार्य हितेष पत्त, आचार्य राकेश धस्माना आदि लोगों ने भारी संख्या में कथा का रसपान किया.

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